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बढ़ती गर्मी का असर…

आज के समय दुनिया बहुत ही तेजी से बदल रही है। हर तरफ कुछ ना कुछ बदल रहा है, चाहे वह मनुष्य हो या जानवर हो या प्रकृति। मनुष्य का तो हमे पता ही है कि वह हमेशा से ही पैसे के पिछे भागता रहता है , लेकिन आज के समय मे वो पैसे के पिछे इतना भाग रहा है कल के आने वाले मुसीबत के बारे मे वो बिलकुल ही अनजान है, वह अपने स्वार्थ और अहंकार के आगे किसी की नही सुनता।

यूरोप मे बढ़ती गर्मी: पिछले साल कि ही बात है जब वहाँ कि तापमान ने 500 सालों का रिर्काड तोड़ दिया था। वहाँ कि कई सारी नदियॉं सुख गई थी। और अमेरिका मे भी कुछ समय से तुफ़ान और बवंडर कि घटनाऐं बढ़ गई है। गर्मी के बढ़ते ही जंगल और वनो मे आग लगने कि भी घटनाऐं बढ़ने लगी है, जबकि जंगल और वन ही कार्ब़न डाईओक्साईड (carbon dioxide)को सोखकर गर्मी को कम करते हैं और तो और हम खुद भी पेड़ो का काटना नही छोड़ रहे हैं।

वैसे सिर्फ CO2 (Carbondioxide) के कारण ही गर्मी नही बढ़ती है बल्कि यदि हवा मे नमी ज्यादा होने से भी गर्मी बढ़ती है। इसके कारण तो कुछ समय पहले Maharashtra मे मौत भी हो गई थी।

ज्यादा गर्मी होने से हमारा शरीर उसे कम करने की कोशिश करता है, इससे खून दिमाग मे ना जाकर ज्यादा शरीर के नसो मे ही दौड़ता है,ओर इससे दिमाग पर भी असर पड़ता है। अगर इससे भी शरीर का तापमान कम नही होता तो शरीर पसीना छोड़ता है, जो की शरीर से गर्मी लेकर evaporate हो जाता है। इसलिए गर्मी मे हमे ज्यादा पानी पीना चाहिए जिससे कि हमारे शरीर का तापमान normal रहता है।

माना कि हमे सुख,सुविधा चाहिए, लेकिन हमे प्रकृति से खिलवाड़ नही करना चाहिए। हमे अपने सीमा मे रहकर ही सुख सुविधा का आनंद लेना चाहिए, तभी हम शांति से जीवन जी पाऐंगे।

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